What is Share in Hindi – शेयर क्या है?

You are currently viewing What is Share in Hindi – शेयर क्या है?
Spread this article

What is Share in hindi:- नमस्कार दोस्तों, आज हम देखेंगे, What is Share in hindi

शेयर खरीदने और बेचने का काम सोचने से पहले उसे सीखना और समझना, बेहद जरुरी और फायदेमंद है। आइये जानते है, What is Share in hindi

यहाँ दी गयी जानकारी के आधार पर, आप इसका पूरा तकनीक समझ जाओगे।

अनुक्रम दिखाएँ

What is Share in hindiशेयर क्या है? 

मान लो, आप को कोई कंपनी स्थापित करनी है, या फिर अपना कारोबार बढ़ाना है। इस लिए आपको 10 करोड़ रुपयों की आवशकता है। तो आप यह रक्कम कैसे और कहासे जुटाओगे? जाहिर है की; आपको इस के लिए पार्टनर जुटाने होंगे। जिनसे आप यह पैसा जुटा सकते हो। इस लिए 10 करोड़ रुपयों के छोटे-छोटे हिस्से आपको करने होंगे। 

एक हिस्से की कीमत 10 रुपये होगी, जिसे मार्केट की भाषा में इसे Face Value कहते है।अब इस 10 रुपये face value के एक करोड़ हिस्से यानि शेयर बनेंगे। इस तरह आपके कंपनी के एक करोड़ शेयरो का निर्माण हो जायेगा। जिसके एक शेयर की मूल कीमत 10 रुपये है।अब आपको इन एक करोड़ शेयरों को बेचना है। इस example से आप What is Share in hindi यह समझी गए होंगे।

शेयर कैसे और कहा बेचोगे?

इन्हे बेचने के लिए, आपको SEBI यानि(सेक्युरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया) से परमिशन लेनी होगी, आपको, आपकी कंपनी का रजिस्ट्रेशन करना होगा। SEBI यह एक ऐसी सरकारी संस्था है, जो की सभी भारतीय, आर्थिक बाजारों पर नियंत्रण रखती है। जैसे की Share market, commodity market, Currency Market, Mutual Fund, Bond. 

इन सभी के होने वाले; आर्थिक व्यवहारों पर SEBI की कड़ी और पैनी नज़र होती है। जिसके चलते आम इन्वेस्टर को, SEBI शेअर बाजार के व्यवहारों में सुरक्षा प्रदान करती है। इस के कारण भारतीय बाज़ारों में पारदर्शकता और गतिशीलता, आ रही है। चलिए आगे बढ़ाते है,आपको आपकी कंपनी का रेजिस्ट्रेशन, SEBI के साथ-साथ,

“BSE” (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और “NSE” (नॅशनल स्टॉक एक्सचेंज)

इन दोनों एक्सचेंजो पर करना होगा। या फिर, किसी एक एक्सचेंज पर भी, आप अपनी कंपनी के शेयरों का लिस्टिंग कर सकते हो। वैसे कंपनी लिस्टिंग के लिए, BSE की प्रक्रिया ज्यादा शिथिल और आसान है।इन एक्सचेंज के बारे मे विस्तार में जानकारी, हम आगे दूसरे संस्करण यानि ब्लॉग में जानेंगे।

आप की यह सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, आप अपने शेयरों को, अब बेच सकते हो। जिसके लिए आपको, आपकी कंपनी का IPO लाना होगा।अभी तक तो आप शेयर क्या होता है, यह तो समझ ही गये होंगे। 

आपके पसंदिता लेख।

शेयर कितने प्रकार के होते है?

कंपनी की लागत, यानी संपत्ति के छोटे हिस्से करके, उन्हें बेचा जाता है। उस एक हिस्से को, Share in hindi कहते है, और जो व्यक्ति इस शेयर को खरीद लेता है, उसे शेयर होल्डर कहते है।जिस शेयर होल्डर के पास जितने परसेंट शेयर होंगे, उसकी उतने ही परसेंट की पार्टनरशिप होगी।

शेयर होल्डरों को कुछ अधिकार होते है। शेयर तो शेयर ही होता है। लेकिन शेयर होल्डर को मिलने वाले, अधिकार के बदलाव के कारण ही, शेयर के मुख्य तीन प्रकार माने जाते है। तो आइये जानते है। यह Share in hindi के प्रकार कौनसे है? और कौनसे शेयर होल्डर को, क्या अधिकार प्राप्त होता है? 

इक्विटी शेयर क्या है?

Equity Share जिसे Common Share भी कहते है। यह वही सर्वसाधारण शेयर है, जिसे हम जानते है। जिसकी शेयर बाजार में खरेदी और बिक्री होती है। शेयर के इस प्रकार में, शेयर होल्डर को वोटिंग यानि अपना मत देने का अधिकार होता है। जिसके आधार पर, व्यक्ति अपना वोट देकर बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर का चुनाव कर सकता है।चुनाव के पहले कंपनी व्यवस्थापन की तरफ से, शेयर होल्डर को जानकारी दी जाती है।

अगर शेयर होल्डर, वोटिंग के लिए निर्धारित समय पर नहीं जा सका, तो वह व्यक्ति अपना वोट प्रॉक्सी (Proxy) के जरिये, कंपनी को भेज सकता है। इक्विटी शेयर होल्डर कंपनी का पार्टनर होता है। इस लिए उसकी कंपनी के प्रति उतनी ही जिम्मेदारी होती है, जो एक कंपनी मालिक की होती है।

मान लो, अगर कंपनी की नैया डूब जाती है; यानि कंपनी लॉस में जाती है, और कंपनी का लिक्विडेशन होता है। तो कंपनी के जरिये, सारी संपत्ति बेचकर, पहले अन्य देनदारोंका पैसा चुकाया जायेगा। जैसे की, बॉन्ड होल्डर, प्रेफर्ड शेयर होल्डर, और अन्य डेट होल्डर, इन सबका पैसा चुकाने के बाद, जो सम्पत्ति का हिस्सा बचेगा, उसमे से इक्विटी शेयर होल्डर को, उसके इन्वेस्टमेंट के प्रमाणा नुसार, पैसे वापस मिलेंगे। 

अब आपको इक्विटी शेयर के बारे मे, इतना तो समझ आ ही, गया होगा की; इस में फायदा यह है की, शेयर होल्डर को वोट देने का अधिकार प्राप्त है।और नुकसान यह है की कंपनी का दिवाला निकलने के बाद। यानि कंपनी का लॉस होने के बाद, उस कंपनी के संपत्ति पर शेयर होल्डर का अधिकार सबसे आखिर में होता है। जो की एक मालिक का फर्ज होता है।

प्रेफरेंस शेयर क्या है?

Preference Share in hindi के इस प्रकार में, शेयर होल्डर को वोटिंग, यानी चुनाव का अधिकार नहीं होता है। जब कंपनी फायदे में होती है। तभी जो डिविडेंड दिया जाता है।उस पर इन प्रेफरेंस शेयर धारकों का अधिकार, कॉमन शेयर धारकों से पहले होता है।और इनको फिक्स्ड डिविडेंड दिया जाता है।

कंपनी जब दिवालिया(लॉस) घोषित की जाती है; तभी उस कंपनी के संपत्ति पर, प्रेफरेंस शेयर होल्डर का अधिकार पहले होता है। इस प्रेफरेंस शेयर के बारे मे अब आप यह समझ गये होंगे की; इस में शेयर होल्डर भले ही वोटिंग का अधिकार नहीं है, लेकिन रिस्क यानी जोखिम भी कम होती है। 

सेविंग शेयर क्या है?

यह Saving Share in hindi का प्रकार, इक्विटी शेयर/कॉमन शेयर, के समान ही होता है। सिर्फ इसमें शेयर होल्डर को वोटिंग, यानी चुनाव का अधिकार प्राप्त नहीं होता है। वैसे यह शेयर का प्रकार, भारत देश में नहीं है। इस लिए, इस शेयर के प्रकार पर हम चर्चा नहीं करेंगे। 

शेयर खरीदने के फायदे क्या है?

अब हमने जाना के, शेयर के प्रकार कौनसे होते है।और शेयर होल्डरों के, अधिकार क्या होते है।आगे हम जानेगे की, इक्विटी शेयर में पैसों की लगत करना, जोखिम भरा होता है।

लेकिन सोच समझकर, इन्वेस्टमेंट करना काफी फायदेमंद भी होता है।आइये जान लेते है, शेयर खरीदने के फायदे क्या होते है? और उसमे किस प्रकार के लाभ होते है? 

डिविडेंड क्या है?

अब किसी कंपनी को उसके कारोबार में, नफा(फायदा) होता है। यानि कंपनी के कुल आय, से यानि(आमदनी) से, सारे खर्चे, जैसे की गवर्नमेंट टैक्ससेस, कच्चा माल, बिजली की खपत, और उत्पादनो पर होने वाले सारे खर्चे, घटाने के बाद जो शुद्ध नफा- Net profit बचता है। उसी नफे के रक्कम को, सारे शेयर धारकों मे, उनके शेयर धारण के प्रमाणा नुसार बांटा जाता है।उसेही डिविडेंड कहते है। 

कंपनी कई बार अपने रिज़र्व फण्ड से भी डिविडेंड देती है। शेयर होल्डरों को, यह डिविडेंड कब और कितना देना है; उसका निर्णय और घोषणा, उस कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर, उनकी बोर्ड ऑफ़ मीटिंग में तय करते है। डिविडेंड दो प्रकार से दिए जाते है।

  1. एक होता है, इंटरिम डिविडेंट(Interim Dividend) 
  2. दूसरा, फाइनल डिविडेंड(Final Dividend)

समय- समय पर डिविडेंड देकर, कंपनी के मुनाफे को, अपने शेयर धारोको में वितरण करना, यह कंपनी के बेहतरीन होने और अच्छाइयों को दर्शाता है। इस लिए हमेशा, शेयर बाजार में शेयर खरीदते समय, उन्ही कंपनी के शेयरों का चुनाव करना चाहिए, जो कंपनी अपने शेयर होल्डर्स को, नियमित रूप से डिविडेंड, यानि लाभांश दे रही हो। इन्वेस्टमेंट और ट्रेंडिंग के लिए, शेयर खरीदने का चुनाव और निर्णय, कब और कैसा करना चाहिए? इसके के बारे मे विस्तार में जानकारी, हम आगे जानेगे। 

बोनस शेयर क्या है?

बोनस शेयर यह लम्बे समय के लिए, शेयर खरीदने का एक अतिरिक्त लाभ है। आइये जानते है, यह बोनस शेयर क्या होता है? जब कोई भी कंपनी का मुनाफा /Profit ज्यादा होता है; और उस प्रॉफिट से डिविडेंड देने के बाद, प्रॉफिट का कुछ हिस्सा, कंपनी के भविष्य कालीन विस्तार और विकास योजनाओं के लिए, आरक्षित किया जाता है। उसे कंपनी का रिज़र्व फंड / Reserve Fund कहते है, यानि आरक्षित निधी।

इस प्रकार जब कोई कंपनी, हर साल लगातार, बेहतरीन कारोबार करती है। और उस कंपनी का रिज़र्व फंड बढ़ता है। तो कंपनी अपने शेयर होल्डर्स को, बोनस शेयर देने का फैसला करती है। जो की, इन्व्हेस्टरोंको काफी लाभ दायक होता है। अकॉउंट / Account की भाषा मे कहे तो, कंपनी को जो सरप्लस / Surplus, प्रॉफिट होता है। वह रिज़र्व फंड में जमा होता है।और जब वह रिज़र्व फंड बढ़ जाता है।

तो उसे शेयर कैपिटल (Share capital) अकॉउंट, में ट्रांसफर किया जाता है। इसका नतीजा, कंपनी के बैलेंस शीट (Balance sheet) में बदलाव, कुछ इस प्रकार होता है। अब तक, जो रिज़र्व फंड की रकम, ज्यादा बढ़ी हुई दिखाई दे रही थी, वह शेयर कैपिटल में ट्रांसफर होने के कारण घट जाएगी। और Share capital की रकम बढ़ जाएगी।

शेयर धारकों को बोनस शेयर कब और कितने दिए जाते है? 

इसका निर्णय पहलेसेही कंपनी मैनेजमेंट तय करती है, उसके बाद शेयर धारकों के, मीटिंग में उसका रेसोलुशन पास किया जाता है। और बोनस शेयर देने की घोषणा की जाती है। जब बोनस शेयर देने की घोषणा की जाती है, तभी से उस कंपनी के शेयर में, डिमांड बढ़ना शुरू हो जाता है। जिसके कारण, शेयर में बढ़त होना शुरू हो जाता है। और उसके शेयर की कीमत में, काफी सारी हलचल दिखाई देने लगती है।ब बोनस शेयर का Ex- Date हो जाता है। और सारे बोनस शेयर, शेयर होल्डर के डिमेट खातों में आ जाते है।

उसक बाद शेयर की कीमती, बाजार में स्थिर होने लगती है। यदि कंपनी 1 : 1 (One is to One), इस प्रमाण में बोनस शेयर देने का निर्णय लेती है। तो आपके पास अगर किसी कंपनी के 100 शेयर होंगे तो बोनस शेयर मिलने के बाद, आपके पास उसी कंपनी के 200 शेयर हो जायेंगे।

किन्तु यह बोनस शेयर का लाभ, सिर्फ उन्हें ही मिल सकता है। जिनके पास पहले से, यानी रिकोर्ड डेट के समय आपके Demat Account में शेयर होंगे। अगर रिकॉर्ड डेट के समय आपके Demat Account में उस कंपनी के शेयर नहीं होंगे, तो आप को बोनस शेयर का लाभ नहीं मिलेगा। 

राइट्स इशू क्या है

अगर आप किसी कंपनी के शेयर होल्डर हो, और उस कंपनी को अपनी संपत्ति बढ़ानी है। यानि Share capital बढ़ाना है। तो वह कंपनी, फिर से अपनी कंपनी के शेयर इशू करती है। जब कंपनी को दोबारा अपनी कंपनी के शेयर बेचने के लिए, इन्वेस्टरों को आमंत्रित करना होता है ; तभी पुराने शेयर होल्डर को यह शेयर खरीदने का मौका पहले मिलता है। उनको खरीदने का अधिकार पहले होता है। उसे राइट इशू कहते है।

इस लिए कंपनी शेयर होल्डरों को, नोटिस भेजकर सूचित करती है। अगर किसी को, यह शेयर खरीदने होंगे तो 15 दिनों के भीतर, या कंपनी ने जो तारीख और समय निर्धारित किया होगा ; उस अवधि के भीतर वह शेयर खरीदने की कारवाई पूरी करनी होती है। राइट इशू (Right issuse) का प्राइस, बाजार भाव से कम होता है। अगर ज्यादा होगा तो, उसे कोई शेयर होल्डर खरीदेगा ही नहीं। वह उसे सीधे बाजार से खरीद लेना पसंद करेगा। 

स्टॉक स्प्लिट शेयर क्या है

किसी भी कंपनी के शेयरों की, IPO द्वारा स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग होती है। तभी उसकी Face Value दर्शनी कीमत 10 रूपए होती है। कुछ दिनों बाद जब किसी शेयर की कीमत बढ़ जाती है। और लिक्विडिटी बढ़ने और घटने लगती है। तभी कंपनी का मैनेजमेंट, उस शेयर को स्प्लिट करने का निर्णय लेता है।

स्प्लिटिंग का कार्य कुछ इस प्रकार होता है। मान लो कंपनी के शेयर की Face Value 10 रूपए है, तो उसे घटाकर यदि 2 रूपए किया गया, तो 10 / 2 = 5 यानि 1 शेयर के 5 शेयर हो जायेंगे। यदि आपके पास 100 शेयर है तो; उसके 500 शेयर होंगे। और शेयर मार्केट में उसकी कीमत भी 5 गुना कम होगी।

स्टॉक स्प्लिटिंग के बारे में, जानने की योग्य बात यह है की; भलेही इस शेयर की Face Value, 10 रूपए से 2 रूपए हो गयी हो, लेकिन उस कंपनी का मूल्य नहीं घटता। उसके करोबार में कोई बदलाव नहीं हुआ होता है। इसका संबंध कंपनी के प्रॉफिट और लॉस से नहीं है; बलके शेयर मार्केट के लिक्विडिटी से है।

शेयर की स्प्लिटिंग में, इन्वेस्टर का लाभ क्या है?

शेयर की स्प्लिटिंग में, इन्वेस्टर का लाभ यह होता है की ; उसके डीमैट खाते में, शेयरों की संख्या बढ़ जाती है।और अगर कंपनी का कारोबार भी अच्छा रहा, तो एक या दो साल बाद, शेयर बाजार में भी, उसके शेयर की कीमत बढ़ जाती है ; यह कीमत बढ़कर दुगनी भी हो सकती है। इस प्रकार किसी शेयर का विभाजन(spliting) होने से, भी शेयर होल्डर को लाभ होता है।

यह होते है, शेयर खरीदने के अतिरिक्त फायदे। जिनके तरफ, ज्यादा तर लोगों का ध्यान नहीं होता है। लोगों का ध्यान तो सिर्फ, शेयर बाजार में होनेवाली, उठा – पटक की तरफ होता है। बाजार के साथ, कंपनियों के शेअरों की कीमतों में, होने वाले बदलाव, उतार- चढाव, से होने वाले फ़ायदों के बारे मे विस्तार में चर्चा, हम आगे की चरण में करेंगे।

उसके पहले एक शेयर की महत्वपूर्ण जानकारी, हम आपको देना चाहते है। जैसे की; आपने जाना डिविडेंड, बोनस शेयर, स्टॉक स्प्लिट, राईट इशू, इनसे शेयर होल्डर को किस प्रकार से लाभ होता है! लेकिन यह सब तभी संभव हो सकता है; जब वह शेयर आपके Demat account में हो। अगर आप यह सब लाभ उठाने हेतु, कंपनी घोषणा के बाद, सम्बंधित शेयर खरीदना चाहते हो तो, आपको कंपनी के निम्नलिखित जरुरी बातों को, और टाइमिंग को समझना होगा। आइये जानते है, यह जरुरी बाते कौनसी है? 

बुक क्लोज़र और रिकॉर्ड डेट क्या है?

किस व्यक्ति के नाम पर, कितने शेयर है? इन सब बातों का रिकॉर्ड, कंपनी के पास होता है। उसे रिकॉर्ड बुक कहते है। कंपनी के मैनेजमेंट ने निर्धारित की हुई, तारीख को कंपनी रिकॉर्ड बुक में, शेयर होल्डर के नाम, और किस के नाम पर, कितने शेयर है? उसकी जानकारी कंपनी को मिलती है। जब कंपनी को डिविडेंट, बोनस शेयर, राईट इशू, स्प्लिट, डिक्लेयर करना होता है। तभी इस रिकॉर्ड बुक की जरुरत पड़ती है। जब कंपनी बोनस शेयर, डिविडेंड, राइट इशू, इनकी घोषणा करती है, तभी एक निर्धारित तारीख भी घोषित करती है। उसे रिकॉर्ड डेट कहते है।

उस तारीख के दौरान, कंपनी अपना रिकॉर्ड बुक्स बंद रखती है, इस के कारन, बुक में कोई नई एंट्री दर्ज नहीं होती है; उसे बुक क्लोज़र कहते है; और सभी रिकॉर्ड की टिपणी की जाती है। उस तारीख को रिकॉर्ड डेट कहते है। 

नो डिलीवरी समय क्या है?

नो डिलीवरी समय, का मतलब होता है ; शेयर की डिलीवरी कुछ समय के लिए ना मिलना। जब कंपनी बुक क्लोज़र, और रिकॉर्ड डेट को जाहिर करती है। तभी उस समय आपको, उस कंपनी के शेयर की डिलीवरी नहीं मिल पाती है।

उस समय में आप, शेयर का व्यवहार तो कर सकते हो, लेकिन उन शेयरों की डिलीवरी, आपको बुक क्लोज़र,और रिकॉर्ड डेट की समय तिथि, ख़त्म होने के बाद ही मिल पायेगी। इस समय की अवधि में, कंपनी से जो लाभ मिलना होता है ; वह सिर्फ उन्ही शेयर धारकों को मिलता है। जिन के नाम उस समय शेयर होते है। 

एक्स – डेट क्या है?

इसे जरा ध्यान से समझे। नो डिलीवरी की जो तारीख होती है ; उसके पहले के दिन को ex – date कहते है। इस एक्स – डेट के दिन, और उसके दूसरे दिन, जो भी शेयर के व्यवहार होते है; उनको कंपनी की तरफ से मिलने वाले उपरोक्त लाभ, नहीं मिल पाते।

महत्वपूर्ण सन्देश

जो इन्वेस्टर, शेयर बाजार में नए होते है; उनसे मार्केट में, यह ग़लती होती है की; डिविडेंड और बोनस शेयर का न्यूज़ सुनकर, वह शेयर खरीद लेते है। परन्तु उनको कोई लाभ नहीं मिल पता, उसका कारन यह है की; वह सही समय पर, शेयर की खरीदारी नहीं कर पाते। अतः उन्हें, यही सलाह रहेगी के वे लोग अधूरी जानकारी के आधार पर, शेयर की खरीदारी ना करे। बलकि, वे शेयर बाजार की, पूरी जानकारी ले और हमेशा शेयर बाजार से लाभ ही उठाए। 

शेयर की कीमतों में बढ़ोतरी से होने वाले लाभ

अब हम जानते है, उस लाभ के बारे मे, जिसके बारे में लोग लालाइत रहते है। शेयर बाजार में शेयरों की कीमत हमेशा, बढ़ती और घटती रहती है। उसी कीमतों की उतार – चढ़ाव को देखकर, शेयर बाजार की तरफ लोग आकर्षित होते है।

शेयर में कीमत कैसे बढ़ती है, और उस से लाभ, कैसे उठाया जा सकता है! 

जब किसी कंपनी का कारोबार अच्छा होता है। तो उसके शेयरों में ख़रीदारो कि मांग बढ़ती है। वैसे तो शेयर में डिमांड बढ़ने के, अनेक कारन होते है। जैसे;

  • कंपनी का तिमाही रिजल्ट(Quaterly Result) 
  • पुरे साल का रिजल्ट(Annual Result) जब अच्छा, यानि प्रॉफिट में होता है।
  • डिविडेंट या बोनस शेयर देने की घोषणा करती है।
  • कंपनी को कोई बड़ा ऑर्डर मिलता है।
  • किसी कोर्ट केस में कंपनी की जीत होती है।

यही वह मुख्य कारन है, जिनके होने से या भविष्य में, होने की आशा से, उन शेयरों में डिमांड बढ़ती है, और परिणाम स्वरूप उनकी कीमते भी बढ़ती है। वैसे तो बैंक पॉलिसी, गवर्नमेंट पॉलिसी, इनमे कोई सकारात्मक बदलाव हो। और वह बदलाव, किसी क्षेत्र के लिए लाभ दायक हो, तो उनसे सम्बंधित, कंपनीयो के शेयरों में भी, तेजी आ जाती है। ऐसे अन्य छोटे-मोठे कारन भी, हो सकते है। जिनसे शेयरों में तेजी आती है। 

शेयर मार्केट के महत्वपूर्ण बाते, जो हर Beginners ने याद रखना चाहिए

वैसे तो शेयर मार्केट का क्षेत्र खूब विशाल है। इस लिए सारी बाते, एक ही लेख में नहीं समझायी जा सकती है। इसे पूरी तरह समझने के लिए, शेयर बाजार के अनेक पहलुओं को भी समझना होगा। इस क्षेत्र में, कई बार ऐसा भी होता है की, सट्टेबाज लोग, किसी शेयरों में कृत्रिम तेजी दिखाकर, उसकी कीमत में उछाल, ले आते है, और सामान्य इंवेस्टरोको आकर्षित करते है। आम इन्वेस्टर, इन सब बातो से अनजान होने के कारन, इस में धोका खा जाते है।

इसी के कारन, वह शेयर बाजार के बारे में उदासीन, और नकारात्मक हो जाते है, और शेयर बाजार बदनाम होता है वास्तव में यह सत्य नहीं है। इसमें सिर्फ आप लोगों की सतर्कता, और आपका योग्य प्रशिक्षित होना, बोहोत जरुरी है। हमने सभी पहलूपर रौशनी डालने हेतु इस वेबसाइट में एक कॉमन ब्लॉग के जरिये संक्षिप्त जानकारी दी है। इस में दिए हुए लिंक के ऊपर क्लिक करने पर आप उस विषय में पूरी जानकारी हासिल कर सकते हो।

आज हमने क्या सीखा!

अगर आप इस शेयर बाजार के क्षेत्र में थोडीसी हिम्म्त करो, और इसके बारे मे अध्यन का मन बनाव, तो यह आपके लिए मनचाहे पैसे कमाने का एक बेहतरीन जरिया बन सकता है। तो दोस्तों ये मैंने आपको बहुत अच्छी तरह से समझाने की कोशिश की है; की What is Share in hindi अगर आपको यह आर्टिकल informative लग रहा है। तो आप अपने Social Media Platforms, दोस्तों और फॅमिली मेंबर्स को जरूर शेयर कीजिये जिससे उन्हें भी समझे की; What is Share in hindi

अगर आपको यह Article, What is Share in hindi इस लेख को लेकर कोई भी संकोच हैं। या आपको इस Article में कोई सुधार होना चाहिए, ऐसा लग रहा है। तो आप तुरंत हमें comment कर सकते हो।


Written by; Vinay Chikane


Spread this article
5 Comments
[…] YOU MAY LIKE THIS > शेयर क्या होता है। […]
[…] > शेयर  क्या  होता  है | […]
Aryaman April 26, 2021
| |
Nice article